१६-१७ फ़रवरी को फ्रांस स्थित यूनेस्को के मुख्यालय पर “विकिलीक्स के बाद मीडिया जगत और दुनिया का समाचार” नाम से एक सम्मलेन का आयोजन किया गया | चौंकाने वाली बात यह है कि, विकीलीक्स घटनाक्रम के सन्दर्भ में पत्रकारों के काम करने के बारे में बुनियादी सवाल उठाने वाले इस सम्मलेन में विकीलीक्स को ही आमंत्रित नहीं किया गया |
इस घटना ने जहाँ प्रेस की स्वतंत्रता को ले कर यूनेस्को की मंशा पर गहरा प्रश्नचिंह लगाया है वहीँ भेद-भाव, और चर्चा के गैर- लोकतान्त्रीकरण (de-democratization) का ओछा उदाहरण भी दिया है | विचार-विमर्श के मर्म यानि कि विभिन्न एवं परस्पर विरोधी विचारों का एक मंच पर मंथन, को बड़ी ही सहजता से दर किनार करते हुए यह सम्मलेन संपन्न भी हो गया | सबसे अधिक आश्चर्य यह कि, सम्मलेन का उद्देश्य अग्रणी मीडिया प्रतिनिधियों, पेशेवर और “नागरिक” पत्रकारों और मीडिया कानून विशेषज्ञों, के मध्य विचारों का आदान-प्रदान और डिजिटल युग में पारंपरिक पेशेवर पत्रकारिता और नागरिक पत्रकारिता में अच्छे व्यवहार पर चर्चा करना था |
इसमें कोई दोराय नही कि इन्टरनेट के इस युग में विकीलीक्स जैसी पत्रकारिता सरकारों और नेताओं को नाकों चने चबवा दिए हैं, और एक खतरे कि तरह बना हुआ है | विकीलीक्स अपनी वेबसाइट पर सनसनीखेज खबरें जारी करने के लिए जाना जाता है | जैसे कि- गुआनटानामो बे शिविर में कैदियों से संबंधित 779 गुप्त फ़ाइलें, अफगानिस्तान युद्ध में उपकरण के व्यय का लेखा-जोखा, केन्या में भ्रष्टाचार, बगदाद हवाई हमले की फुटेज अपाचे हेलीकाप्टर द्वारा मारे गए लोगों के बीच इराकी पत्रकार भी थे, और भी अनेकों ऐसे ख़ुफ़िया दस्तावेज | आश्चर्य की बात नहीं कि अमेरिका, चीन, युनाइटेड अरब एमिरात्स, थाईलैंड, भारत समेत कई देशों में विकीलीक्स को ब्लाक किया गया है |
ऐसा लगता है कि पत्रकारिता के नए दायरों का निर्माण शुरू हो रहा है | विकीलीक्स इंटरनेट के जरिये व्यक्ति के जानकारी को बाँट सकने की क्षमता का एक उदहारण मात्र है | और इन्टरनेट के इस युग में पत्रकारिता के दायरों का निर्माण किस कदर सफल हो पायेगा यह कह पाना मुश्किल है |
मुझे युनेस्को द्वारा आयोजित सम्मलेन पर विकीलीक्स द्वारा जारी किये गए प्रेस विज्ञप्ति को पढना था | अतः मैंने विकीलीक्स की वेबसाइट खोजने का प्रयास किया | जवाब मिला “सर्वर नॉट फाउन्ड” | कुछ देर बाद मैंने जब प्रेस विज्ञप्ति को खोजने का प्रयास किया तब मुझे इसके ५-६ से अधिक प्रतियाँ मिलीं | ब्लॉग पोस्ट के रूप में कई लोगों द्वारा इस विज्ञप्ति को पोस्ट किया गया है |
यह कहा नहीं जा सकता कि विकीलीक्स को ब्लाक किया गया है या नहीं पर यह साफ़ है कि यही इन्टरनेट कि सच्चाई है | यदि कोई जानकारी किसी एक स्तर पर बंद कर दी जाये, विभिन्न लोगों द्वारा उपलब्ध कराइ गयी अनेकों नकलें उसकी आम व्यक्ति के लिए उपलब्ध है | यह अन्य बात है कि देश के बाहर के सर्वर का इस्तेमाल करते हुए भी यह जानकारी हासिल कि जा सकती है | इन्टरनेट की खूबसूरती यही है कि आम व्यक्ति जैसे कि वो ब्लोगर्स जिन्होंने यह विज्ञप्ति उपलब्ध कराइ, उन्हें जानकारी बना सकने, और बाँट सकने कि क्षमता प्रदान करता है | और इस वजह से जानकारी कहीं न कहीं पर किसी न किसी रूप में प्राप्त हो ही जाती है |
यूनेस्को संवेदीकरण और निगरानी संवेदीकरण और निगरानी के माध्यम से एक बुनियादी मानव अधिकार के रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है | यह मीडिया की स्वतंत्रता और बहुलवाद को लोकतंत्रीकरण की प्रमुख कारक के रूप में बढ़ावा देता है | इस सम्मलेन का इस प्रकार आयोजन पत्रकारिता के साथ साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया के गैर- लोकतान्त्रीकरण की ओर इशारा है |

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